10 जनवरी 2010

लापता बच्चों का किसी भी तरह से नहीं मिल रहा था सुराग

निठारी केस की जांच में नोएडा पुलिस के सभी सीनियर अधिकारी से लेकर कई सब इंस्पेक्टर जुटे हुए थे। अधिकारी गाइड करते थे। लेकिन फील्ड वर्क सब इंस्पेक्टर करते थे। जगह-जगह घूमना और पूछताछ करने की जिम्मेदारी दो स्टार लगाने वालों के कंधों पर थी। इस केस की जांच में पुलिस ने बहुत मेहनत की। लेकिन लापरवाही भी पग-पग पर हुई। छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना, नोएडा पुलिस की फितरत थी। रही है और लगता है आगे भी रहेगी। जबकि क्राइम के हर केस में सभी छोटी चीज काफी महत्वपूर्ण होती है। खैर, लापरवाही तो बहुत हुई। उसकी चर्चा बाद में। पहले, जांच अधिकारियों की बात।
इस केस की सबसे ज्यादा देर तक जांच की सब इंस्पेक्टर विनोद पांडे ने। निठारी से लगातार गायब हो रहे बच्चों की जांच करने वाली टीम कई बार बदली थी। लेकिन कुछ कॉमन रहा था तो वह है टीम में एसआई विनोद पांडे का होना। विनोद पांडे बताते हैं कि निठारी से गायब हुए बच्चों में ज्यादातर लड़कियां थी। इसलिए शक हुआ कि नोएडा में ऐसा गिरोह सक्रिय है जो बच्चियों को बहला फुसला कर उन्हें बेच दे रहा है या फिर वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेल रहा है। क्योंकि इस तरह के देश-विदेश में कई मामले सामने आ चुके थे। लिहाजा, जांच की दिशा भी इसी के इर्द-गिर्द थी। यही वजह है कि मामला तूल पकडऩे पर गायब बच्चों के परिजनों को लेकर आगरा, बिहार, हरियाणा, राजस्थान से लेकर मुंबई तक के चक्कर लगाए गए। लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों को जवाब नहीं दे पाते थे। आखिर क्या हुआ बच्चों के साथ। जमीन खा गई या आसमां निगल गया। इसके बावजूद जांच जारी रही।

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